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अजमेर में भाजपा के मेयर और कांग्रेस सरकार की आयुक्त के बीच शह-मात का खेल।


Ajmer:

अजमेर में भाजपा के मेयर और कांग्रेस सरकार की आयुक्त के बीच शह-मात का खेल।
पार्षदों की साधारण सभा बुलाने की मांग धरी रह गई। 

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अजमेर शहर के बहुचर्चित 13 कॉमर्शिलय नक्शों को स्वीकृत करवाने के लिए कांग्रेस और भाजपा के 35 पार्षदों ने साधारण सभा बुलाने की जो मांग की थी, वह धरी रह गई। अब 17 जून को नगर निगम की साधारण सभा नहीं हो सकेगी। असल में नगर निगम के काम को लेकर भाजपा के मेयर धर्मेन्द्र गहलोत और कांग्रेस सरकार की आयुक्त सुश्री चिन्मयी गोपाल के बीच शह मात का खेल हो रहा है। जिस प्रकार शतरंज के खेल में खिलाड़ी एक दूसरे को मात देने के लिए कोई मौका नहीं छोड़ते उसी प्रकार मेयर और आयुक्त ने नगर निगम में शतरंज की बिसात बिछा रखी है। गत 26 अप्रैल को स्थानीय निकाय के निदेशक पवन अरोड़ा ने अजमेर नगर निगम की आयुक्त गोपाल को निर्देश दिए थे कि साधारण सभा में 13 विवादित नक्शों के प्रकरण को रखकर निस्तारण किया जाए, लेकिन जब सरकार के निर्देश पर आयुक्त ने साधारण सभा नहीं बुलाई तो 7 जून को कांग्रेस और भाजपा के 35 पार्षदों ने मेयर को पत्र लिखकर साधारण सभा बुलाने की मांग की। इधर पार्षदों का पत्र मिला, उधर मेयर ने हाथों हाथ आयुक्त को यू नोट भेजकर आगामी 17 जून को प्रात: 11 बजे साधारण सभा बुलाने की निर्देश दे दिए। सरकार को भी पता है कि विवादित नक्शों को स्वीकृत करवाने में कांग्रेस और भाजपा के पार्षद एकजुट है, इसलिए सात जून को ही सरकार की एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीपी शर्मा ने एक पत्र आयुक्त गोपाल को थमा दिया। इस पत्र में 13 विवादित कॉमर्शियल नक्शों की फाइलें मांगी गई। एसीबी के इस पत्र की जानकारी होने पर 10 जून को सुबह 9:30 बजे ही मेयर गहलोत ने आयुक्त गोपाल को सूचित किया कि वे फाइल की फोटोकॉपी एसीबी को दें, ताकि साधारण सभा में कोई बाधा उत्पन्न न हो। एसीबी अपनी जांच फोटो प्रतियों से भी कर सकती है। मेयर की सूचना पर मासूमियत के साथ आयुक्त ने कहा मेयर साहब मैंने तो फाइलों को 7 जून को ही एसीबी को भिजवा दिया। अब आप मार्गदर्शन दें कि मैं साधारण सभा कैसे बुलाऊं? साधारण सभा में विवादित नक्शों की मूल फाइल का होना जरूरी है। मेयर ने जानना चाहा कि जब एसीबी के पत्र में 10 जून को फाइल उपलब्ध करवाने की बात कही गई थी तो फिर 7 जून को ही फाइलें कैसे भिजवादी गई? सूत्रों की माने तो इस पर आयुक्त की ओर कहा गया कि जिस प्रकार 7 जून को 35 पार्षदों का पत्र मिलते ही मुझे साधारण सभा बुलाने के लिखित आदेश मिल गए, उसी प्रकार एसीबी का पत्र मिलते ही फाइल भिजवा दी गईं। इससे जाहिर है कि  मेयर और आयुक्त के बीच शह मात का खेल चल रहा है। दोनों की खींचतान की वजह से निगम के काम काज पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि मेयर गहलोत के निर्देश पर उपायुक्त गजेन्द्र सिंह रलावता ने जो 13 कॉमर्शियल नक्शे स्वीकृत किए थे, उन्हें राज्य सरकार द्वारा गठित जांच कमेटी ने निरस्त कर दिए थे। सरकार अब इस प्रकरण की एसीबी से भी जांच करवा रही है।

एस.पी.मित्तल) (10-06-19)

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