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महबूबा मुफ्ती से भी ज्यादा खतरनाक हो रही हैं पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी।


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अब तक तो देश विरोधी बयान देने के लिए जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती को ही खतरनाक माना जाता था, लेकिन लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी सबसे खतरनाक राजनेता हो गई है। कश्मीर में तो अनुच्छेद 370 की वजह से मुफ्ती संविधान को नहीं मानती, लेकिन पश्चिम बंगाल में तो भारत का संविधान पूरी तरह लागू होता है, लेकिन ममता बनर्जी ऐसा प्रदर्शन कर रही है जिससे यह जाहिर होता है कि वे संविधान से ऊपर हैं।

पहले कहा मैं नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री नहीं मानती, फिर कहा कि मैं मोदी को लोकतंत्र का थप्पड़ मारना चाहती हं और अब कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद मोदी से चुन चुन कर बदला लूंगी।

यह तो 23 मई के बाद ही पता चलेगा कि ममता दीदी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से किस प्रकार बदला लेंगी, लेकिन सवाल उठता है कि आखिर ममता बनर्जी मोदी और केन्द्रसरकार से इतना खफा क्यों हैं? जबकि प्रधानमंत्री तो आशीर्वाद के तौर पर ममता से थप्पड़ खाने को भी तैयार है। इससे ज्यादा और गंभीर बात क्या हो सकती है कि अपने राजनीतिक स्वार्थों की वजह से ममता दीदी केन्द्रीय सुरक्षा बलों पर आरोप लगा रही है कि ये आरोप वैसे ही है जैसे कश्मीर में महबूबा मुफ्ती लगाती है।

पश्चिम बंगाल में सीआरपीएफ की तैनाती निष्पक्ष चुनाव के लिए चुनाव आयोग के निर्देश पर हुई है। चूंकि पश्चिम बंगाल की सीमा पड़ौसी बांग्लादेश से लागी हुई है, इसलिए सीआरपीएफ की तैनाती स्थायी है। ममता का कहना है कि बीएसएफ के जवान अपराधियों को बंग्लादेश से बुलाकर दंगा करवाते हैं। सब जानते हैं कि पश्चिम बंगाल की पुलिस ममता दीदी के इशारे पर काम करती है। गुंडातत्व जब राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या करते हैं, तब पुलिस मूक दर्शक बनी रहती है। पुलिस के संरक्षण की वजह से गुंडातत्व मतदान केन्द्रों पर कब्जा कर ममता की टीएमसी के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करवाते हैं।

लोकसभा चुनाव के प्रथम और द्वितीय चरण में ऐसी शिकायतें मिलने के बाद चुनाव आयोग ने केन्द्रों के अंदर सीआरपीएफ के जवानों की तैनाती की। ताकि मतदाता भयमुक्त होकर मतदान कर सके। असल में आयोग के ऐसे ही सख्त निर्णयों से ममता दीदी खफा है। ममता दीदी दो बार तो सीएम बन चुकी है, लेकिन अब सीएम का पद छोडऩा नहीं चाहती हैं, इसलिए हर तरीके से चुनाव जीतना चाहती है। ममता को लगता है कि चुनाव आयोग मोदी के दबाव में केन्द्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती कर रहा है।

जहां तक पश्चिम बंगाल में ममता की उपस्थिति का सवाल है तो उसमें तेजी से गिरावट आई है। ममता की अलोकप्रियता की वजह से बंगाल में भाजपा को पैर पसारने का मौका मिला है। डर इस बात का भी है कि यदि 23 मई को बंगाल में भाजपा को 15-20 सीटें मिल गई तो ममता बनर्जी किस तरह प्रतिक्रिया देंगी? अभी जब एक दो सीट में ही यह हाल है तो 15-20 सीटों को कैसे बर्दाश्त करेंगी। लोकसभा चुनाव के बाद ही बंगाल में विधानसभा के चुनाव होने हैं।

क्या ममता दीदी विधानसभा चुनाव में हार की कल्पना कर सकती है? प्रियंका शर्मा नाम की एक युवती को 12 मई को ही जेल भेजा गया है। प्रियंका ने सोशल मीडिया पर ममता के चित्र वाले पोस्टर को शेयर किया था। जब ममता को अपने कार्टून पर इतना गुस्सा आता है तो फिर चुनाव की हार के गुस्से का अंदाजा लगाया जा सकता है। ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल को उसी राह पर ले जा रही है जिस राह पर महबूबा मुफ्ती और अब्दुल्ला परिवार कश्मीर को ले गया।

यदि बंगाल के हालात बिगडते हैं तो कश्मीर से भी ज्यादा खतरनाक स्थिति होगी, क्योंकि कश्मीर के मुकाबले पश्चिम बंगाल बड़ा राज्य है। ममता को चाहिए कि वे लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता पर काबिज रहे। ममता को उड़ीसा के पटनायक परिवार से सीख लेनी चाहिए। यदि कोई राज्य सरकार सभी लोगों के हित में निर्णय लेती है तो केन्द्र सरकार कुछ नहीं कर सकती।

सीआरपीएफ के जवान के तौर पर संघ के कार्यकर्ता:

पश्चिम बंगाल में केन्द्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी से ममता दीदी इतना घबरा गई है कि वे अब सीआरपीएफ के जवानों को भी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का कार्यकर्ता बता रही हैं। ममता का कहना है कि सीआरपीएफ के जवानों के तौर पर संघ के स्वयं सेवक पश्चिम बंगाल में नियुक्त किए गए हैं।

ममता का यह बयान बहुत गंभीर है। ममता को अब सबूत देने चाहिए कि संघ के कौन कौन से स्वयं सेवक सीआरपीएफ की वर्दी पहनकर मतदान केन्द्रों पर नियुक्त किए गए। संघ और केन्द्र सरकार को भी ममता के इस बयान को गंभीरता के साथ लेना चाहिए। ममता टीएमसी की कोई साधारण कार्यकता नहीं है बल्कि सीमा से लगे पश्चिम बंगाल के प्रदेश की मुख्यमंत्री हैं।

शाह के हेलीकॉप्टर को अनुमति नहीं:

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमितशाह को 13 मई को बंगाल के जाधवपुर में चुनावी सभा करनी थी, लेकिन बंगाल सरकार में शाह के हेलीकॉप्टर को उतरने की अनुमति नहीं दी। ऐसे में जाधवपुर में शाह की चुनावी सभा नहीं हो सकती। सवाल उठता है कि क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई राजनीतिक दल चुनावी सभा भी नहीं कर सकता? हालांकि अब बंगाल सरकार की शिकायत भाजपा ने चुनाव आयोग से की है। (NEWSVIEW MEDIA NETWORK)