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मैं 23 मई के बाद भी राजस्थान का मुख्यमंत्री बना रहूंगा-अशोक गहलोत।


Ajmer:

मैं 23 मई के बाद भी राजस्थान का मुख्यमंत्री बना रहूंगा-अशोक गहलोत।

मीडिया की वजह से सीएम बना। भाजपा का संघ में विलय हो जाना चाहिए।

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आए दिन मीडिया को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमितशाह का समर्थक बताने वाले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अब कहा है कि वे मीडिया की वजह से ही तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने हैं। 13 मई को जयपुर में पत्रकारों से संवाद करते हुए गहलोत ने कहा कि गत विधानसभा चुनाव से पहले और फिर परिणाम के बाद मीडिया ने जो माहौल बनाया, उसका परिणाम रहा कि मैं तीसरी बार मुख्यमंत्री बना। गहलोत ने कहा कि वर्ष 2013 के परिणाम के बाद वे तो राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हो गए थे। लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव के मौके पर अखबार मालिकों और मेरे पत्रकार दोस्तों ने जो सकारात्मक भूमिका निभाई उसी की वजह से मैं सीएम बन सका। जब एक पत्रकार ने 23 मई के बाद लोकसभा चुनाव के परिणाम पर प्रतिक्रिया जानना चाहता तो गहलोत ने कहा कि वे 23 मई के बाद भी राजस्थान के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि आप लोग मुझे फिर से दिल्ली क्यों भेजना चाहते हैं। गहलोत ने कहा कि दिल्ली में वे अपने भूमिका वेणुगोपाल को सौंप कर आए हैं और वेणुगोपाल हाईकमान के भरोसे पर खरे उतरे हैं। मेरा दोबारा से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय होने का कोई  इरादा नहीं है। लोकसभा चुनाव के परिणाम पर हारजीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा के सवाल पर गहलोत ने कहा कि यह सेहरा प्रदेश की जनता के सिर पर ही बंधेगा क्योंकि जनता की जीताती है और जनता ही हराती है।

संघ में भाजपा का विलय:

गहलोत ने कहा कि लोकसभा के चुनाव में प्रदेश में भाजपा की कमान पूरी तरह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के हाथ में थी। संघ के कार्यकर्ताओं ने भाजपा के पक्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संघ की सक्रियता पर मुझे कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन मैं संघ के प्रमुख मोहन भागवत को सलाह देना चाहता हंू कि भाजपा का विलय संघ में कर लिया जाए। आज भाजपा की सभी राजनीतिक गतिविधियां संघ के इशारे पर ही होती है। सरकार के निर्णय भी संघ करता है। सरकार के महत्वपूर्ण पदोंं पर संघ के स्वयं सेवक बैठे हुए हैं। संघ की भाजपा राजनीति में इतनी सक्रियता है, लेकिन पूरा देश जनता है कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद संघ के पदाधिकारियों ने तत्कालीन केन्द्रीय गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को लिखकर दिया था कि संघ सिर्फ सांस्कृतिक गतिविधियों तक ही सीमित रहेगा। तभी संघ पर से प्रतिबंध हटा था, लेकिन आज पूरा देश देख रहा है कि संघ किस प्रकार राजनीति में सक्रिय हैं।

एस.पी.मित्तल) (13-05-19)

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